Thursday, February 2, 2012

TU HI TU


आंखों को इंतज़ार की आदत सी हो गई , यही ख्याल ऐ यार की आदत सी हो गई
अब कोई दूसरा मिले भी तो दिल चाहता नही,
क्यूँ की हमको तेरी दोस्ती की आदत सी हो गई

 कुछ दुरी कुछ मजबूरी, मैं इस पार तू उस पार, फ़िर उसपर है तू खफा खफा
मैं ने की मिन्नत बार बार, बहुत हो गया इंतज़ार, अब तो बाहोने में ले ले मेरे यार

देखे हजारो महफिले पर ये फिजा कुछ और है, जलवे देखे है हजारो पर आप की अदा कुछ और है,
वैसे तो हजारो जाम है पर आपकी दोस्ती का नशा कुछ और है

अभी इस तरफ़ न निगाह कर, मैं ग़ज़ल की पलकें संवार लूँ,
मेरा लफ्ज़ लफ्ज़ हो आइना, तुझे आईने में उतार लूँ

तेरी याद दिलको बेकरार करती हैं नज़र तुझे तलाश करती है,
गिला नही जो हम है दूर तुमसे, तेरी तोह जुदाई भी हमसे प्यार करती है



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